अर्थ विमर्श

व्यापार जगत की गुत्थियां शेयर बाजार की हलचल महंगायी और बजट की सरगर्मियां सब पर रखता राय

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Posted On: 19 Feb, 2016  
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जानिये, ये भारतीय उद्योगपति हैं कितने पढ़े-लिखे

Posted On: 23 May, 2015  
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पिछले 15 वर्षों में अनेकक्षेत्रों मे अभूतपूर्व सुधार वा क्रांति आई है, चाहे वह टेलिकॉम हो या बॅंकिंग परंतु खेद की बात है की लोग इन्वेस्टमेंट प्पलान्निंग में अभी भी बैंक सावधि जमा या पोस्ट ऑफीस के अतिरिcक्त कोई अन्या बेहतर उपलब्ध विकल्प नहीं अपनाते हैं, यदि वास्तव में आप कैपिटल सेफ्टी की गारंटी के साथ, कम से कम बैंक के फिक्स्ड डिपाजिट रेट से पांच गुना, इंटरेस्ट कमाना चाहते हैं तो पूर्ण विश्वास के साथ संपर्क करें पूर्णतः इन्वेस्टमेंट ऑप्शन है, कोई एमएलएम, नेटवर्क मार्केटिंग नहीं: बैंक एफडी इंटरेस्ट तो इन्फ्लेशन को भी कवर नहीं करता, साथ में डिपाजिट स्प्लिट करने और टीडीएस बचाने के लिए बार बार फॉर्म १५ ह १५ ग भरो या टैक्स कटवाकर रिफंड के लिए परेशान हो. संपर्क - कमल श्रीवास्तव 09825869434 या मेरे फ्ब पेज पर अपना संपर्क इनबॉक्स करें.

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नेपाल के तबाही नेपाल में भूकम्प का रहा कुछ ऐसा कहर ! खंडहरों में तबदील हो गया मुस्कुराता शहर ! भव्यता ही रही इसकी पहचान हैं ! आज लग रहा हैं कि श्मशान हैं ! हर तरफ दिख रहा इसका साफ -साफ असर ! खंडहरों में तबदील हो गया मुस्कुराता शहर ! हर तरफ दर्द और खौफ का माहौल हैं ! ऊपर से वारिश भी उड़ा रहा मखौल हैं ! प्रकृति भी दिखा रही अजब तेवर ! खंडहरों में तबदील हो गया मुस्कुराता शहर ! भूकम्परोधी इमारतें भी हो गयी ध्वस्त ! हौसले वाले भी दिख रहे हैं पस्त ! बची जिंदगिया भी हैं घर सा बेघर ! खंडहरों में तबदील हो गया मुस्कुराता शहर ! कितना शांति और सुकून था पहले ! अब कितना अशांति और खौफ दिख रहा ! हर वर्ग को झेलना पद रहा हैं इसका असर ! खंडहरों में तबदील हो गया मुस्कुराता शहर ! सभी लोग ले रहे खुले में पनाह ! किसी को समझ में नहीं आता भूकम्प करेगा कब क्या ? भूकम्प में दिखा भारत सबसे पहले मद्द को तत्पर्य ! खंडहरों में तबदील हो गया मुस्कुराता शहर ! भूकम्प ने मचा रखा हैं हर तरफ तबाही ! नेपाल का कण -कण दे रहा इसकी गवाही ! हे भगवान कब ख़त्म होगा इसका असर ! खंडहरों में तबदील हो गया मुस्कुराता शहर ! अभिषेक अनंत ग्राम - मंझरिया , पोस्ट -मठिया , थाना - लौरिया जिला - प० चंपारण (बेतिया ) बिहार-८४५४५३ मो - ८८९६७८३३०९ , ७७६१९१८६२७ ईमेल - abhishekanant.philosophy@gmail.com

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नेपाल के तबाही नेपाल में भूकम्प का रहा कुछ ऐसा कहर ! खंडहरों में तबदील हो गया मुस्कुराता शहर ! भव्यता ही रही इसकी पहचान हैं ! आज लग रहा हैं कि श्मशान हैं ! हर तरफ दिख रहा इसका साफ -साफ असर ! खंडहरों में तबदील हो गया मुस्कुराता शहर ! हर तरफ दर्द और खौफ का माहौल हैं ! ऊपर से वारिश भी उड़ा रहा मखौल हैं ! प्रकृति भी दिखा रही अजब तेवर ! खंडहरों में तबदील हो गया मुस्कुराता शहर ! भूकम्परोधी इमारतें भी हो गयी ध्वस्त ! हौसले वाले भी दिख रहे हैं पस्त ! बची जिंदगिया भी हैं घर सा बेघर ! खंडहरों में तबदील हो गया मुस्कुराता शहर ! कितना शांति और सुकून था पहले ! अब कितना अशांति और खौफ दिख रहा ! हर वर्ग को झेलना पद रहा हैं इसका असर ! खंडहरों में तबदील हो गया मुस्कुराता शहर ! सभी लोग ले रहे खुले में पनाह ! किसी को समझ में नहीं आता भूकम्प करेगा कब क्या ? भूकम्प में दिखा भारत सबसे पहले मद्द को तत्पर्य ! खंडहरों में तबदील हो गया मुस्कुराता शहर ! भूकम्प ने मचा रखा हैं हर तरफ तबाही ! नेपाल का कण -कण दे रहा इसकी गवाही ! हे भगवान कब ख़त्म होगा इसका असर ! खंडहरों में तबदील हो गया मुस्कुराता शहर ! अभिषेक अनंत ग्राम - मंझरिया , पोस्ट -मठिया , थाना - लौरिया जिला - प० चंपारण (बेतिया ) बिहार-८४५४५३ मो - ८८९६७८३३०९ , ७७६१९१८६२७ ईमेल - abhishekanant.philosophy@gmail.com

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कलक्टर परीक्षा के बाद बनता है ! पुलिस अधीक्षक परीक्षा के बाद बनता है ! डॉक्टर भी परीक्षा के बाद बनता है ! न्यायधीश भी परीक्षा के बाद बनता है ! सेना का सेनाध्यक्ष भी परीक्षा के बाद बनता है ! देश के वरिष्ट वैज्ञानिक भी परीक्षा के बाद बनता है ! देश का हर कर्मचारी किसी भी परीक्षा के बिना नहीं बनते ! मगर ऐसा क्यूँ आप जानकर भी चुप है ? --------------- --------------- --------------- देश की बागडोर अनपढो के हाथ में क्यूँ ? जवाब दो ? 1. गाँव वार्ड सदस्य 2. गाँव का सरपंच 3. डेलिकेट 4. प्रधान 5. विधानसभा का विधायक 6. नगर पालिका का पार्षद 7. नगर पालिका का अध्यक्ष 8. नगर निगम का अध्यक्ष 9. संसद के सदस्य 10.लोक सभा के सदस्य 11.यहाँ तक मंत्री भी 12.प्रधानमंत्रीका यही हाल है 13 राज्य का मुख्यमंत्री जवाब दो इनकी परीक्षा क्यूँ नहीं ली जाती ? देश का रक्षा मंत्री क्या सेना में था ??? देश का सवास्थ्य मंत्री डॉक्टर क्योँ नही ? देश का शिक्षा मंत्री अध्यापक क्योँ नही ? आँखो से पर्दा हटाओ दोस्तो और मशाल जलाओ । ज्यादा से ज्यादा लाइक शेयर करो मित्रो और ये पोस्ट पूरी फेसबुक पर फैलानी है

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शायद,,,,,ऩहीं ,,,,,,,,,,,,,,मॅहगाई कितनी भी क्यों ना बढ जाए निवेसकों पर कोई असर नही पडेगा आयात कितना भी मॅहगा हो जाये  निवेसक नहीं चूकेगे   जब तक देश मैं राजनितीक स्थिरिता रहेगी    मॅहगाई भी आयतित हो सकती है लेकिन कुल मिलाकर  हम आत्म निर्भर हैं मुख्यतः खाद्यान्न मैं  ,,,,निवेसक तो स्थिरता ही चाहता है,,हां अगर  राजनितीक अस्थिर सरकार आ जाये तो निवेसक खासतौर से विदेशी निवेसक भागते नजर आयेंगे स्थिर सरकार कुछ ना कुछ रास्ता निकाल ही लेती है अर्थशात्र के नियमनूसार य़ह उतार चडाव एक चक्र मैं आता रहता है कल अमेरिका जूझ रहा था आज वह सॅभलता नजर आ रहा है तो भारत नीचे आता,,,,,, समय स्वयं ही सभालेगा    हमारे पास सबसे बडी शक्ति हमारा बिशाल बाजार है  समय का इंतजार करते हुए   कहैं,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,, ओम,,,,, शांति ,,,शांति ,,,,,शांति,,,,,,,,,,,,,,,,

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के द्वारा: Social Issues Blog Social Issues Blog

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आप कर्ज लेनेवाले के हित के बार मे सोच ते है । कर्ज देनेवाले के बारे मे भी सोचिए । सरकार और कर्ज लेनेवाले, कर्ज देनेवाले ( बचतकार ) को गधे समज ते है । पूरी जिन्दगी गधे की तरह नौकरी धन्धा करके पैसे बचाओ । बेन्क मे रख्खो, बुढे होने पर लखपति केहलाओगे । बाकी की जिन्दगी आराम से कट जायेगी । बुढा होने पर मालुम पडता है अब लखपति को रोडपति कहा जाता है । करन्सी की वेल्यु कम हो गई है, बेन्कोने कुछ नही दिया है । उन के लिये तो थक हार कर मरनेका ईन्तजार ही बचता है । आज हम बाजारु ईकोनोमी को ले के चल पडे है । सब सुखाकारी को विकास के साथ जोड दीया है । स्थिरता की बाते कोइ नही सोचता । पैसे की वेल्यु स्थिर रहे, मेहन्गाई स्थिर रहे , पगारे भी स्थिर रहे । अपने पैरो पर खडा रेह कर विकास की बाते नही होती, दुसरे के पैसे से ऐश करो । ऐसे ऐश पर लगाम आती है तो ऐसे ब्लोग लिखे जाते है । मैने कई जगह देखे । (((उत्पादों की मांग में कमी आती है और महंगाई बढ़ती है. )))) ये आप का केहना गलत है । मेहगाई बढती नही घटती है । बाजारमे एक मजबूरी नामका पेहलु भी काम कर जाता है । कुछ चिजो बिना आदमी चला लेता । पैसे कम हो तो आदमी मजबूर नही उसे खरिदने के लिये । उत्पादक मजबूर हो जाता है किमत सस्ता करने के लिये । नफा कम करके भी उसे तो बेचना ही है । उची ब्याज दरे आदमी को कन्ट्रोल मे रखती है, उची उडान भरने से पेहले ही उसे नमीन पर पटकती है, फीर अपने पैरो पर खडे रेहना सिखाती है, चद्दर के बाहर पैर नही निकालने देती । निची ब्याज दरे एक पक्ष को अन्याय करके दुसरे पक्ष को फायदा पहुचाती है । ये खूद-ब-खूद भ्रष्टाचार है । सरकार कोई साधु सन्त नही है । प्रजा के प्रति उसका कोई सही कदम हो वो तो मुर्ख ही मान सकता है । ब्याज दर बढाना उसकी मजबूरी है । मेहन्गाई को दबाने की कसरत उन की मजबूरी है । यु.पी. का राज तिलक नजदिक है । दुसरे चुनाव भी आयेन्गे । २०१४ के बाद ही आशा करो ब्याज दर घटने की ।

के द्वारा: bharodiya bharodiya

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बधाई उस व्यक्ति को जिसने यह लेख लिखा --- साथ उन्को यह जानकारी भी रखने चाहिए कि भारत में कानून है कहाँ ? कानून केवल गरीब - अक्षम लोगो के लिए है - अब चूँकि भारत में जितने भी कानून हैं वह सब के सब अंग्रेजों के द्वारा ही बनाये गए है कोई १८६० का तो कोई १८९५ तक के ही है -- हम आत्म-प्रशंसा तो बहुत करते है कि बाबा साहेब आंबेडकर ने हमारे देश का संविधान बना कर हमें कृतार्थ कर दिया और हम स्वतंत्र भी हो गए हमने अपना संविधान बना लिए पर हमें मिला क्या - आज भी हम गुलामी के कानूनों को ही ढो रहे है या फिर वह लोग ही अक्षम है जो क़ानून के रक्षक है वह ही क़ानून का पालन करना नहीं जानते या उनमे इच्छा शक्ति कि कमी है --- वहीँ देश के कर्णाधार ही सो रहे है जो सक्षम क़ानून बनाने के स्थान पर संसद में हुडदंग करते है केवल अपनी अपनी पार्टी हित को देखते है देश हित कि उन्हें कोई परवाह ही नहीं - फिर तो यही होना है जो हो रहा है हम और आप तो केवल क्रांति का इन्तजार ही कर सकते हैं- एक सार्थक लेख

के द्वारा: s p singh s p singh

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‎280 लाख करोड़ का सवाल है ... भारतीय गरीब है लेकिन भारत देश कभी गरीब नहीं रहा"* ये कहना है स्विस बैंक के डाइरेक्टर का. स्विस बैंक के डाइरेक्टर ने यह भी कहा है कि भारत का लगभग 280 लाख करोड़ रुपये (280 ,00 ,000 ,000 ,000) उनके स्विस बैंक में जमा है. ये रकम इतनी है कि भारत का आने वाले 30 सालों का बजट बिना टैक्स के बनाया जा सकता है. या यूँ कहें कि 60 करोड़ रोजगार के अवसर दिए जा सकते है. या यूँ भी कह सकते है कि भारत के किसी भी गाँव से दिल्ली तक 4 लेन रोड बनाया जा सकता है. ऐसा भी कह सकते है कि 500 से ज्यादा सामाजिक प्रोजेक्ट पूर्ण किये जा सकते है. ये रकम इतनी ज्यादा है कि अगर हर भारतीय को 2000 रुपये हर महीने भी दिए जाये तो 60 साल तक ख़त्म ना हो. यानी भारत को किसी वर्ल्ड बैंक से लोन लेने कि कोई जरुरत नहीं है. जरा सोचिये ... हमारे भ्रष्ट राजनेताओं और नोकरशाहों ने कैसे देश को लूटा है और ये लूट का सिलसिला अभी तक 2010 तक जारी है. इस सिलसिले को अब रोकना बहुत ज्यादा जरूरी हो गया है. अंग्रेजो ने हमारे भारत पर करीब 200 सालो तक राज करके करीब 1 लाख करोड़ रुपये लूटा. मगर आजादी के केवल 64 सालों में हमारे भ्रस्टाचार ने 280 लाख करोड़ लूटा है. एक तरफ 200 साल में 1 लाख करोड़ है और दूसरी तरफ केवल 64 सालों में 280 लाख करोड़ है. यानि हर साल लगभग 4.37 लाख करोड़, या हर महीने करीब 36 हजार करोड़ भारतीय मुद्रा स्विस बैंक में इन भ्रष्ट लोगों द्वारा जमा करवाई गई है. भारत को किसी वर्ल्ड बैंक के लोन की कोई दरकार नहीं है. सोचो की कितना पैसा हमारे भ्रष्ट राजनेताओं और उच्च अधिकारीयों ने ब्लाक करके रखा हुआ है. हमे भ्रस्ट राजनेताओं और भ्रष्ट अधिकारीयों के खिलाफ जाने का पूर्ण अधिकार है.हाल ही में हुवे घोटालों का आप सभी को पता ही है - CWG घोटाला, २ जी स्पेक्ट्रुम घोटाला , आदर्श होउसिंग घोटाला ... और ना जाने कौन कौन से घोटाले अभी उजागर होने वाले है .....

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