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Verghese Kurien Profile : वर्गीस कुरियन- श्वेत क्रांति के जनक

Posted On: 10 Sep, 2012 Others में

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Verghese Kurien Profile in Hindi

एक कहावत है “अकेला चना क्या भाड़ फोड़ सकता है”. इस कहावत का अर्थ है कि अकेला इंसान कुछ नहीं कर पाता. लेकिन असल जिंदगी में यह सुक्ति कई बार अर्थहीन साबित होती है. अब आप श्वेत क्रांति के जनक वर्गीस कुरियन को ही देख लीजिए.


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 Verghese KurienWhite Revolution of India: Operation Flood

भारत में श्वेत क्रांति के जनक माने जाने वाले वर्गीस कुरियन की मृत्यु हो गई है. वर्गीस कुरियन 90 वर्ष के थे. वर्गीज कुरियन ने भारत को दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में सरताज बनाने के लिए कई बड़े कार्य किए. उनकी अथक मेहनत की वह से ही दूध की कमी वाला यह देश दुनिया के सबसे बड़े दूध उत्पादक देशों में शुमार हुआ. दूध के क्षेत्र में सहकारी मॉडल को लाकर उन्होंने गुजरात और अन्य देशों के असंख्य गरीब किसानों की जिंदगी संवार दी.


Profile of Milk Man: Verghese Kurien

1921 में केरल के कालीकट में जन्मे डाक्टर वर्गीस कुरियन ने इंजीनियरिंग की पढ़ाई की और बाद में आगे की पढ़ाई करने के लिए वह अमेरिका चले गए. भारत वापस आकर उन्होंने भारत को दूध में आत्मनिर्भर बनाने की ठान ली और अपने मिशन के लिए गुजरात के आनन्द को चुना. आनंद से उन्होंने “ऑपरेशन फ्लड या श्वेत क्रांति” की शुरुआत की और लोगों को उनकी ताकत के बारे में जानकारी भी दी.


डाक्टर कुरियन के आने के बाद आनंद को एक विश्व स्तर पर एक नई पहचान मिली और भारत दुनिया में दूध का सबसे बड़ा उत्पादक देश बना. आनन्द की जिस सहकारी समीति की डाक्टर कुरियन ने शुरुआत की उसके ही उत्पाद आज “अमूल” के नाम से घर-घर में आता है.


Amul and Operation Flood

वर्गीAmul ज कुरियन ने दूध को प्रसंस्कृत कर इसके उप्तादों को जो जल्दी खराब नहीं होते उन्हें मार्केट में अमूल ब्रांड के अंतर्गत उतारा. डॉक्टर कुरियन ने साल 1973 में गुजरात को-ऑपरेटिव मिल्क मार्केटिंग फेडरेशन (जीसीएमएमएफ) की स्थापना की और 34 साल तक इसके अध्यक्ष रहे. जीसीएमएमएफ (GCMMF)अमूल नाम से डेयरी प्रॉडक्ट बनाता है.


जीसीएमएमएफ के अंतर्गत 11 हजार से अधिक गांवो के लगभग 20 लाख से ज्यादा किसान कार्य करते हैं. जीसीएमएमएफ की ही सफलता की वजह से आज भारत दुध उत्पादन के क्षेत्र में अग्रणी है.


amul milk Milk Production in India

1949 में जिस समय डॉक्टर कुरियन ने आनंद में को संभाला था उस समय देश में दूध उत्पादन क्षमता प्रति वर्ष लगभग 17 मीलियन टन था जो साल 2000-2001 आते आते बढ़कर 84.6 मीलियन और साल 2011-12 में 127 मीलियन टन हो चुका है. सिर्फ दूध ही नहीं दूध से बने अन्य उत्पादों में भी अमूल ने अपनी छाप छोड़ी.


सिर्फ दूध उत्पादन ही नहीं डॉ. कुरियन के द्वारा संचालित “श्वेत क्रांति” ने लाखो ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने का कार्य किया विशेषकर राजस्थान में. डॉ. कुरियन ने दूध के क्षेत्र में नीजिकरण का विरोध कर उसे सहकारी बनाया और बिचौलियों से बचाते हुए दूध को सीधे किसानों से उपभोक्ताओं तक पहुंचाने का एक बेहतरीन मॉडल तैयार किया.


कुरियन को उनकी सेवाओं के लिए भारत सरकार ने पद्म श्री, पद्म भूषण और पद्म विभूषण अवॉर्ड से नवाजा गया था. 1965 में उन्हें रेमन मैगसायसाय (Ramon Magsaysay Award) पुरस्कार से सम्मानित किया गया था. और इतना ही नहीं विश्व स्तर पर भी उन्हें 1989 में विश्व खाद्य पुरस्कार (World Food Prize) से नावाजा जा चुका है.


वर्गीस कुरियन के जाने से देश में श्वेत क्रांति को बड़ा धक्का लगा है. उनकी कार्य कुशलता और मैनेजमेंट के गुणों को अमूल हमेशा याद रखेगा और उनकी अनुपस्थिति जरूर खलेगी.


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Tag: Verghese Kurien, father of White Revolution, Dr Verghese Kurien dies, Operation Flood, white revolution, white revolution in India, White Revolution of India, amul white revolution



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