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टूटने वाली है कमर, तैयार रहिए- भाग 3

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पिछले अंक से आगे……

पिछले अंक में अंतरराष्ट्रीय बाजार में रुपया गिरने से पैदा हुए आर्थिक असंतुलन पर चर्चा की गई थी. रुपया गिरने से किस प्रकार छोटे-बड़े घरेलू, औद्योगिक उपक्रम एक-दूसरे से जुड़े होने के कारण एक साइकल की तरह काम करते हुए समूचे देश की अर्थव्यवस्था (Economy) के लिए संकट पैदा करते हुए आर्थिक असंतुलन पैदा करते हैं. इसके लिए कई बार कुछ तकनीकी शब्दावली भी प्रयोग किए जाते हैं, जिनमें प्रमुख है व्यापार घाटा.

व्यापार घाटा: व्यापार घाटा उस स्थिति को कहते हैं जब निर्यात से ज्यादा आयात होने लगे और आयात भी पहले की तुलना में महंगा हो जाए. अर्थात आयात ज्यादा और निर्यात कम हो जाए. ऐसी स्थिति को व्यापार घाटा कहते हैं. इससे व्यापारिक असंतुलन पैदा होता है. निर्यात कम होने से डॉलर (Dollar) की आय कम हो जाएगी और आयात में डॉलर (Dollar) की खपत बढ़ जाएगी. ऐसे में रुपया कम हो जाने के कारण आयात पर कर भी बढ़ा दिए जाएंगे. इससे आयातकों के लिए व्यापार हानि की स्थिति पैदा हो जाएगी. इस व्यापार हानि को संतुलित करने लिए ये बाजार में अपने उत्पादों के दाम बढ़ा देंगे. इस प्रकार चीजों के दाम बढने से वापस महंगाई साइकल के रूप में अर्थव्यवस्था (Economy) को वैसे ही नुकसान की स्थिति में ले जाएगी जैसी अन्य स्थितियों में होती है.

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महंगाई रोकने के लिए क्या करती है सरकार

रुपया गिरने से अर्थव्यवस्था (Economy) में आई इस अनिमियतता और महंगाई को काबू करने की जिम्मेदारी सरकार की होती है. सरकारी उपक्रमों द्वारा ही घाटे में चल रही आपकी आर्थिक स्थितियों को सुधारने के तमाम उपाय किए जाते हैं. महंगाई बढ़ने के कई और उपक्रम भी हैं जिन पर पहले ही चर्चा हो चुकी है. पर यहां बात हो रही है रुपया गिरने से महंगाई बढ़ने की और अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले इसके नकारात्मक प्रभाव की. पिछले दो भागों से (भाग 1, भाग 2) हम इसके नकारत्मक प्रभावों और महंगाई बढ़ाने के उपक्रमों की चर्चा कर रहे हैं. यहां इस अनियमित अर्थव्यवस्था (Economy) को काबू करने के सरकारी प्रयासों की चर्चा की जा रही है.

रुपए के गिरने से उत्पन्न हुए अर्थव्यवस्था (Economy) के असंतुलन को कम कर वापस पहले की स्थिति में लाने के लिए भारत सरकार कई उपाय करती है, इनमें से प्रमुख निम्नलिखित हैं:

सार्वजनिक गतिविधियों को बढ़ावा देना (To Promote Public Sector Works): इस असंतुलन को कम करने के लिए भारत सरकार सार्वजनिक गतिविधियों को बढ़ावा देने वाले कार्यक्रम बढ़ा देती है. सार्वजनिक गतिविधियों से आशय है आम आदमी को रोजगार मुहैया कराने वाले उपक्रमों के द्वारा उनकी आर्थिक स्थिति को संबल देना. इसके लिए सरकार पुल बनाने, सड़क बनाने आदि की गतिविधियां बढ़ा देती है ताकि इसके द्वारा ज्यादा से ज्यादा लोगों को रोजगार और अर्थ मिल सके. मनरेगा आदि रोजगार गारंटी जैसी योजनाएं भी इसी उपक्रम का एक हिस्सा हैं. हालांकि राष्ट्रीय कोष को बढ़ाने की दृष्टि से ये गतिविधियां कोई भी लाभ की स्थिति नहीं देतीं, पर यह सब केवल अर्थव्यवस्था (Economy) के असंतुलन को कम करने के लिए होता है. आम जनता को लगता है कि उनके देश का विकास हो रहा है, जबकि हकीकत में देश के अर्थव्यवस्था संकट को दूर करने का यह मात्र एक माध्यम होता है.

इस प्रकार रुपया गिरना केवल सरकार की परेशानी नहीं होती. यह आपकी, हमारी, भारत के हर नागरिक पर नकारात्मक प्रभाव डालती है और अंतत: भारतीय अर्थव्यवस्था (Indian Economy) के लिए संकट की स्थितियां पैदा करती है.

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