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कर्जदाताओं के 7000 करोड़ रुपए खाने वाले अय्याश बिजनेसमैन की कहानी

Posted On: 3 Mar, 2016 बिज़नेस कोच में

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पहली नजर में विजय माल्या को देखने वाले लोग उन्हें एक ऐसे अय्यास की संज्ञा देते हैं जो रे-बैन चश्मे और भारी, महंगे गहने पहनने तथा फॉर्मुला वन और क्रिकेट जैसे खेल को काफी पसंद करता है. आज यही अय्यास कर्जदाताओं के पैसे खाने के आरोप में गिरफ्तार होने की कगार पर पहुंच गया है. स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने उनकी गिरफ्तारी की मांग की है. साथ ही विजय माल्या का पासपोर्ट जब्त करने के लिए भी कहा है ताकि वह देश छोड़ कहीं और ना जा पाएं.


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आपको बता दें स्टेट बैंक ऑफ इंडिया उन 17 कर्जदाताओं के संघ की अगुवाई कर रहा है जिनके पैसे विजय माल्या ने खा लिए हैं. दरअसल अपनी कंपनी किंगफिशर एयरलाइंस के लिए विजय माल्या ने 7000 करोड़ रुपए का कर्ज लिया था जिसे वह अब तक नहीं लौटा पाए हैं. कर्जदाताओं द्वारा पैसे मांगने पर माल्या ने खुद को दिवालिया करार देकर लोन भरने में असमर्थ करार दिया है.


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18 दिसंबर 1955 को जन्में विजय माल्या ने छोटी सी उम्र में ही खुद के अंदर कारोबारी समझ विकसित कर ली थी. महज 30 साल की उम्र में ही माल्या ने यूबी ग्रुप को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक बड़ी कंपनी बना दिया था. यूबी या यूनाइटेड ब्रिउरी ग्रुप की स्थापना उनके पिता विट्टल माल्या ने की थी. यूबी समूह, शराब (बीयर) और मादक पेय उद्योग पर विशेष ध्यान देने वाली कई अलग-अलग कंपनियों का एक विस्तृत समूह है. किंगफिशर ब्रांड इसका एक भाग है जो बीयर बनाती है.  विजय माल्या की अन्य कंपनियों में किंगफिशर नाम से एक एयरलाइंस भी थी जो वित्तीय संकट और कर्ज में डूबने के बाद अक्टूबर 2012 में बंद हो गई.


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कैसे डूबी किंगफिशर एयरलाइंस कंपनी

अपनी तड़क-भड़क भरी जीवन शैली के लिए पहचाने जाने वाले उद्योगपति विजय माल्या पिछले दो साल से किंगफिशर एयरलाइन के वित्तीय संकट की वजह से काफी विवादों में रहे हैं. 2004 में गठित हुई किंगफिशर एक समय भारत की सबसे बड़ी एयरलाइन कंपनी थी लेकिन एयरलाइन के खर्चे इतने ज्यादा थे कि यह ऊंचाई ज्यादा दिन तक टिक न सका. कहा जाता है कि यात्रियों को अपनी ओर खींचने के लिए किंगफिशर द्वारा एक अलग तरह की स्ट्रैटिजी अपनाई गई थी जिसके तहत फूड से लेकर इन-केबिन एंटरटेनमेंट और एयर होस्टेस में ज्यादा से ज्यादा से खर्च किया गया. किंगफिशर का खर्च प्रति पैसेंजर जेट एयरवेज के मुकाबले लगभग दोगुना था.


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किंगफिशर एयरलाइंस में परोसे जाने वाले खाने का खर्च प्रति यात्री 700-800 रुपये था, जबकि जेट में यही खर्च 300 रुपये प्रति पैसेंजर था. खर्च में कटौती के मोर्चे पर माल्या बुरी तरह असफल रहे. शुरुआत में तो माल्या और उनकी कंपनी किंगफिशर की स्ट्रैटिजी कामयाब रही लेकिन जैसे-जैसे कंपनी का खर्च बढ़ता गया जिसमें 2008 के बाद अचानक कच्चे तेल के दाम में बढ़ोतरी भी शामिल है. उससे कंपनी का आर्थिक संकट भी बढ़ गया था. वित्तीय संकट से गुजरने के बाद आखिरकार 2012 में किंगफिशर का लाइसेंस रद्द कर दिया गया. आज किंगफिशर एयरलाइंस के विजय माल्या पर 7,000 करोड़ रुपये का कर्ज है.


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एक अय्यास के रूप में विजय माल्या

विजय माल्या का विलासितापूर्ण भविष्य तभी दिख गया था जब 4 साल की उम्र में उनके पिता ने उन्हें पहली फेरारी कार दिया था. आज भी विलासितापूर्ण जीवन ज्यों का त्यों बरकरार है. चारो तरह से मिल रही आलोचनाओं के बावजूद भी विजय माल्या ने किंगफिशर के लिए हर साल ग्लैमरस हॉट मॉडल्स की फोटो शूट के साथ निकलने वाले कैलेंडर में कहीं कोई कोताही नहीं बरती. एक कर्जदार होने के बावजूद उनकी ग्लैमरस और खर्चीली पार्टियों पर कहीं कोई असर नहीं दिखता…Next


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